किसानों ने मंत्री और सांसद को दिखाए काले झंडे, किसान नेताओं पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग

हरियाणा के नारायनगढ़ में किसानों ने केंद्रीय मंत्री रतनलाल कटारिया और सांसद नायब सैनी को दिखाए काले झंडे

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हरियाणा में कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी पर और मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इसे लेकर प्रदेश के किसान काफ़ी नाराज हैं।

हिंद किसान से फ़ोन पर बातचीत में भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने बताया कि ‘केंद्र सरकार के दबाव में उनके मंत्री हरियाणा में जगह जगह उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा रहे हैं, उनका मकसद है मुझे और मेरे हौसलों को तोड़ना, लेकिन जब तक सरकार इन काले कानूनों को वापस नहीं लेती, हम नहीं झुकेंगे, आंदोलन जारी रहेगा।’ मुकदमों का कारण पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि ‘हमने एक वीडियो संदेश जारी किया था कि इस दशहरा पर भारत में रावण की जगह मोदी के पुतले जलाया जाएगा, हर ब्लाक में। उस बयान पर सरकार ने चार अलग-अलग जगह मुकदमे दर्ज किए हैं।’ उनका कहना है कि ‘आगे और भी मुकदमे दर्ज हो सकते हैं, लेकिन मैं सरकार से यह कहना चाहता हूं कि मुकदमे करके आप किसान की आवाज नहीं दबा सकते, जो तीन कानून जबरदस्ती थोपे गए हैं, वो किसानों के लिए डेथ वारंट हैं।’

पिछले तीन महीनों से किसान लगातार इन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं, पंजाब और हरियाणा खास तौर पर इन आंदोलनों का गढ़ बने हुए हैं। 10 सितंबर को हरियाणा के पीपली में ‘किसान बचाओ, मंडी बचाओ’ रैली का आयोजन किया गया जहां उन पर लाठी चार्ज किया गया, पुलिस ने किसानों के ऊपर मुक़दमे भी दर्ज किए, इसके बाद 25 सितंबर को किसानों ने तीन कृषि कानूनों को काला कानून बताकर इनके विरोध में देशव्यापी हड़ताल की थी। 6 अक्टूबर को हरियाणा के 17 किसान संगठनों ने मिलकर सिरसा में उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन किया, आंदोलन कर रहे किसानों ने पर वाटर केनन और आंसू गैस के गोले दागे। किसानों का कहना है कि ‘पिछले कुछ दिनों से सरकार बौखलाई हुई है और आंदोलन को दबाने की लाख कोशिश कर रही है लेकिन अब किसान सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं, उनमें केंद्र सरकार के खिलाफ जबरदस्त रोष पैदा हो गया है।’

भूमि बचाओ संघर्ष समिति के सदस्य किसान नेता शमशेर सिंह कहते हैं कि ‘किसानों की सड़क से विधानसभा तक आवाज उठाने के संवैधानिक अधिकार को खत्म करने के लिए भाजपा द्वारा लगातार गंभीर धाराओं में किसान नेताओं के खिलाफ झूठे केस दर्ज करने का सिलसिला जारी है। खट्टर सरकार ने कॉरपोरेट्स को लाभ पहुंचाने के लिए प्रदेश के किसान मजदूर को गिरवी रखते हुए हरियाणा को बीजेपी की गलत नीतियों की प्रयोगशाला बना दिया है।’ उन्हें आशंका है कि परेशान करने के लिए प्रदेश के बाहर, दूसरे किसान नेताओं के खिलाफ अभी और मुकदमे दर्ज कराए जाएंगे। उन्होंने किसान नेताओं पर दर्ज मुक़दमों को रद्द किये जाने की मांग की।

नाराज किसानों ने पंजाब और हरियाणा में जगह-जगह बीजेपी सांसदों और मंत्रियों का बहिष्कार करना भी शुरू कर दिया है। 14 अक्टूबर को हरियाणा के नारायनगढ़ में जब केंद्रीय मंत्री रतनलाल कटारिया और सांसद नायब सैनी कृषि कानूनों की हिमायत करने, लोगों में जागरूकता फैलाने के मकसद से ट्रैक्टर रैली निकाल रहे थे लेकिन किसानों ने उनका रास्ता रोका और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

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