1 April से रबी मार्केटिंग सीज़न 2021-22 के लिए FCI ने अनाज ख़रीदी के नियमों में सख़्ती करने का प्रस्ताव सामने रखा है, ताकि खाद्यान्न की गुणवत्ता पर ज़ोर हो और उसका सही रख रखाव हो सके। FCI यानी Food Corporation of India ने गेहूँ, धान में नमी की मात्रा को पहले से कम करने के अलावा और भी तमाम specifications जारी की हैं, हाल ही में केंद्र सरकार ने ये अधिमूचना भी जारी की थी कि इस मार्केटिंग सीज़न से पंजाब में FCI उन्हीं किसानों से ख़रीद करेगी जिनकी ज़मीन का record सरकार के पास है, साथ ही पंजाब में सीधा किसानों के बैंक खातों में DBT के ज़रिए फ़सल ख़रीद का पैसा दिया जाएगा ना की आढ़तियों के ज़रिए, इन सब बदलावों को किसान, आढ़ती और कृषि अर्थशास्त्री कैसे देख रहे हैं, क्या इन बदलावों की टाइमिंग सही है, जबकि देश भर के किसान तीन कृषि क़ानून और MSP की माँग को लेकर पहले ही नाराज़ है, परेशान हैं?
इस मुद्दे पर सुनिए हिंद किसान की ये ख़ास चर्चा, हरियाणा- टिकरी बॉर्डर से किसान नेता-विकल पचार, पंजाब से आढ़ती असोसीएशन के अध्यक्ष विजय कालरा और पंजाब यूनिवर्सिटी, पटियाला से कृषि अर्थशास्त्री- लखविंदर सिंह के साथ।