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छत्तीसगढ़ के किसानों को बड़ी राहत

  • Team Hind Kisan
  • |
  • Jun. 13, 2019
छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने "फूड टू ऑल" का अपना चुनावी वादा पूरा करने की तरफ कदम बढ़ा दिया है. इसके अलावा उन किसानों को भी राहत देने का कदम उठाया है, जिन्हें बैंक खाते एनपीए घोषित किए जाने से नया कर्ज नहीं मिल रहा था.

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राहुल गांधी ने किसानों से किया कर्ज माफी का वादा

  • Team Hind Kisan
  • |
  • Sep. 17, 2018
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में चुनाव अभियान का आगाज कर दिया है। सोमवार को राजधानी भोपाल में उनके रोड शो में भारी भीड़ जुटी। दशहरा मैदान में कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए उन्होंने वादा किया कि कांग्रेस सत्ता में आई तो किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाएगा।

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राहुल गांधी ने किसानों से किया कर्ज माफी का वादा

  • Sep. 17, 2018
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में चुनाव अभियान का आगाज कर दिया है। सोमवार को राजधानी भोपाल में उनके रोड शो में भारी भीड़ जुटी। दशहरा मैदान में कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए उन्होंने वादा किया कि कांग्रेस सत्ता में आई तो किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाएगा।

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मोदी राज में भ्रष्टाचार बढ़ा?

जानी मानी संस्था- सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज के सर्वे में लगभग 75 फ़ीसदी लोगों ने राय जताई कि नरेंद्र मोदी के शासनकाल में भ्रष्टाचार बढ़ा है। भ्रष्टाचार से लड़ने के बीजेपी सरकार की घोषणाओं पर अब लोग कम भरोसा कर रहे हैं।

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FRDI Bill, Cash Hoarding Leave ATM’s Dry, Say Experts

In a deja vu, India is yet again staring at a severe cash crunch with ATM’s running dry. For the past few weeks, more than seven states have been forced to relive the horrors of demonetization, which barely completes 18 months, due to unavailability of cash in ATM’s.

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बैंकिंग का संकटः निजीकरण है समाधान?

देश का बैंकिंग सेक्टर गहरे संकट में है। डूबते कर्ज (NPA) ने पहले ही उनकी हालत खराब कर रखी थी। अब ऊपर से रोज बेनकाब होते नए-नए घोटालों ने देश की बैंकिंग व्यवस्था के लिए साख का सवाल खड़ा कर दिया है। फिक्की और एसोचैम जैसी उद्योग जगत की संस्थाओं ने इसके मद्देनज़र सरकारी बैंकों के निजीकरण की मांग उठा दी है। क्या ये सही समाधान है? देखते हैं, इस सवाल पर एक ख़ास डिबेट।

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नीलोत्पल बसु से ख़ास बातचीत

देश के बैंकिंग सेक्टर का संकट गहराता जा रहा है। डूबते कर्जों की समस्या से सरकारी बैंक पहले से जूझ रहे थे। लगातार सामने रहे घोटालों ने इन बैंकों की मुसीबत बढ़ा दी है। इसी सिलसिले में सरकारी बैंकों के निजीकरण की मांग उठी है। ये मांग कितनी जायज है?

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"बैंकिंग में संकट" पर मौमिता दत्ता से ख़ास बातचीत

बैंकों में बढ़ते घोटाले पर सिविल सोसायटी संगठनों ने पिछले दिनों दिल्ली में एक जन सभा का आयोजन किया। इसका विषय था- किसने चुराया, कौन कीमत चुकाएगा। बैकिंग के इस संकट का कृषि और ग्रामीण क्षेत्र पर भी गहरा असर पड़ेगा।

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