Employment

Vishesh Charcha : कोरोना लॉकडाउन के बाद किसानों का क्या होगा?

कोरोना से निपटने के लिए 3 मई तक लॉकडाउन जारी है. पहले से ही आर्थिक मंदी झेल रहे किसानों और गांवों को अब और भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

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गुलजार रहने वाली राइस मिलों पर लटके ताले

  • Team Hind Kisan
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  • Mar. 18, 2020
झारखंड के बीरभूम जिले में राइस मिलें एक-एक कर बंद हो रही हैं. रोजगार छिनने से सैकड़ों मजदूरों को पलायन करना पड़ रहा है. झारखंड के जमशेदपुर से चंद्रशेखर की रिपोर्ट.

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मनरेगा को लेकर सरकार का दावा कितना सही

  • Team Hind Kisan
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  • Mar. 16, 2020
केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री पुरुषोत्तम रूपाला का दावा है कि मनरेगा के तहत मजदूरों को यूपीए सरकार के मुकाबले दोगुना मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है.

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कहां गई मनरेगा में रोजगार की गारंटी

ग्रामीण इलाकों में ग़रीबों को रोज़गार देने के उद्देश्य से शुरू की गई महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा योजना की हालत दिन प्रति दिन ख़राब होती जा रही है.

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शहद सा मीठा कमाई का रोजगार

अगर आप खेती करते हैं और इसमें होने वाले घाटे से परेशान हैं तो मधुमक्खीपालन कर आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं. देखिए कैसे.

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पर्यटन से रोजगार छिनने का डर

बिहार के कटिहार में पर्यटन को बढ़ावा देने का फैसला किया गया है. लेकिन इससे जितने लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है, उससे कहीं ज्यादा लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.

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रद्दी से चमकी महिलाओं की जिंदगी

  • Team Hind Kisan
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  • Nov. 27, 2019
अखबार की रद्दी को आप बेच देते हैं या फिर फेंक देते हैं. लेकिन यूपी के झांसी में महिलाएं इसी रद्दी का जो इस्तेमाल कर रही हैं उसे देखकर आप हैरान हो जाएंगे.

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मुनाफे का मखाना

देश में सबसे ज्यादा मखाना बिहार में उगाया जा रहा है. मखाना सेहत के लिए तो फायदेमंद है ही राज्य में इसकी बढ़ती खेती किसानों और मजदूरों के लिए भी काफी फायदेमंद साबित हो रही है.

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नए रंग में गांधी की खादी

खादी को जब वस्त्र नहीं विचार कहा जाता है तो इसके पीछे छोटे उद्योगों को खड़ा करने और इससे आने वाली आत्मनिर्भरता होती है. इसी बात को साबित कर रही हैं वर्धा में ग्रामीण महिलाएं जो खादी को नए रंग में दुनिया के सामने पेश कर रही हैं.

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बांस से बनी मनमोहक चीजें

राजस्थान के बांसवाड़ा में सरकार की पहल से दर्जनों महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही है. यहां महिलाएं बांस और लकड़ी से घरेलू इस्तेमाल की चीजें बनाती हैं जिसे देखकर हर कोई तारीफ करने को मजबूर हो जाए.

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बेरोजगारी के नए आंकड़े

बेरोजगारी पर NSSO और CMIE के आंकड़े आने के बाद अब CII के ताजा आंकड़े आए हैं। नए आंकड़े दिखा रहे हैं कि बीते 4 साल में रोजगार पैदा हुआ। वो भी MSME सेक्टर यानी छोटे और मध्यम क्षेत्र में।

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पलायन की मजबूरी

ग्रामीण इलाकों में गरीबों को रोजगार देने और पलायन रोकने के लिए शुरू की गई मनरेगा योजना बुंदेलखंड में दम तोड़ रही है।

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नोटबंदी ने किया खेती-किसानी को बर्बाद- कृषि मंत्रालय

नोटबंदी ने खेती-किसानी को पूरी तरह तबाह कर दिया. नोटबंदी से अर्थव्यवस्था के उस सेक्टर की कमर टूट गई जो देश के जीडीपी में करीब 17 फीसदी और रोजगार में करीब 45 फीसदी का योगदान करता है.

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दो करोड़ के बदले पांच लाख रोज़गार

  • Team Hind Kisan
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  • Jul. 31, 2018
सालाना दो करोड़ युवाओं को रोज़गार का वादा करके मोदी सरकार सत्ता में आई, लेकिन राज्यसभा में सरकार ने कहा कि 2016 के बाद उनके पास बेरोज़गारी के आंकड़े नहीं हैं। देखिए किस तरह ख़ुद सरकार के आंकड़े बताते हैं कि देश में रोज़गार की हालत कितनी ख़राब है।

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माक़ूल हालात के बावजूद मोदीराज में नहीं हो पाया विकास : पूर्व वित्त सचिव मायाराम

नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के चार साल बाद देश की आर्थिक हालत कैसी है? क्या मोदी सरकार की नीतियां कृषि संकट को बदतर के लिए ज़िम्मेदार रहीं और क्या है सबका-साथ, सबका विकास के नारे की हक़ीक़त।

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झूठी धारणा का सहारा?

  • May. 08, 2018
दार्शनिकों ने हमें “असत्य धारणा” (false consciousness) के बारे में बताया है। इसका अर्थ ऐसा भ्रम है, जिसे लोग सच मानने लगें। ऐसा भ्रम जीवन के कई पहलुओं के बारे में सामाजिक संस्कृति, पारंपरिक मान्यताओं आदि से बना होता है। आधुनिक काल में, जन-संचार माध्यमों के उदय के बाद धुआंधार प्रचार से भी ऐसी सामूहिक असत्य धारणाएं बना दिए जाने के उदाहरण मौजूद हैं।

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रोज़गार का कैसा हाल?

देश में रोज़गार के मौके बढ़ रहे हैं या घट रहे हैं? सरकार का दावा है कि रोज़गार में काफी इज़ाफ़ा हो रहा है, लेकिन कई रिपोर्टें इसकी उलटी तस्वीर पेश करती हैं।

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मनरेगा मज़दूरों पर मार

  • Apr. 04, 2018
किसी वर्ष किसी कामकाजी तबके का मेहताना ना बढ़े, तो उसका असली मतलब उस वर्ग की आमदनी घटना होता है। इसलिए कि हर साल मुद्रास्फ़ीति के साथ मुद्रा (यानी रुपए) की वस्तु या सेवा को ख़रीद सकने की ताक़त घट जाती है।

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No Prime Minister, selling Pakodas is not employment

I admit I felt hurt by Prime Minister Narendra Modi’s recent assertion that a person earning Rs 200 a day by selling pakodas is also employed.

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