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भारतीय किसानों की मौत के लिए स्विट्ज़रलैंड में बने कीटनाशक पर आरोप

फोटो स्रोत- इंडियन एक्सप्रेस

भारत में कीटनाशकों का छिड़काव करते वक्त किसानों के बीमार पड़ने और जान गंवाने का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गरमाता जा रहा है। स्विटजरलैंड के गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) पब्लिक आई ने अपने ही देश से निर्यात होने वाले कीटनाशकों को भारतीय किसानों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है और इसके निर्यात पर पाबंदी लगाने की मांग की है। उसने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि स्विटजरलैंड से निर्यातित कैमिकल से 2017 में जुलाई से अक्टूबर के बीच कम से कम 50 कपास किसान जहर के शिकार बने।

पोलो के नाम से बिकने वाले कीटनाशक में डाइफेंथियूरॉन कैमिकल होता है, जिसे स्विटजरलैंड की कंपनी सिजेंटा बनाती है। एनजीओ ने इस पर प्रतिबंधित कीटनाशक का निर्यात करने का आरोप लगाया है। साल 2017 में सिजेंटा ने 126 टन से ज्यादा रसायन का निर्यात किया। इसमें भारत को 75 टन, दक्षिण अफ्रीका को 50 टन और कोलंबिया को 1.5 टन निर्यात किया गया था। इस कीटनाशक को यूरोपीय यूनियन ने 2002 में और स्विटजरलैंड ने 2009 में प्रतिबंधित कर दिया था। यूरोपियन कैमिकल एजेंसी ने डाइफेंथियूरॉन को ‘सांस के जरिए अंदर जाने पर जहरीले’ असर वाला और बार-बार संपर्क में आने पर अंगों को नुकसान पहुंचाने वाला बताया था।

एनजीओ पब्लिक आई ने 20 किसानों की मौत की रिपोर्ट सामने आने के बाद स्विटजरलैंड से पोलो के निर्यात पर पाबंदी लगाने की मांग की है। ये मौतें महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में अकेले यवतमाल जिले में हुईं, जहां पब्लिक आई ने शोध किया था। उधर, सिजेंटा ने सारे आरोपों को खारिज किया है। उसने अपने बयान में कहा है कि ऐसे कोई सबूत नहीं है, जिससे पता चलता हो कि किसानों की मौत के लिए उसका उत्पाद जिम्मेदार है। महाराष्ट्र में अधिकारियों ने सिंजेटा के खिलाफ आपराधिक जांच भी शुरू कर दी है।