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आयुष्मान भारत योजना से पांच राज्यों का किनारा

फोटो स्रोत- पीआईबी

रविवार को शुरु हुई आयुष्मान भारत योजना से पांच राज्यों ने खुद को अलग कर लिया है। इनमें तेलंगाना, ओडिशा, केरल, दिल्ली और पंजाब शामिल हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने इस योजना के लिए फंड के आवंटन और लाभार्थियों की संख्या पर सवाल उठाया है। अभी पंजाब में भगत पूरन सिंह सेहत बीमा योजना लागू है, जिसके दायरे में 29.3 लाख बीपीएल परिवार आते हैं, जबकि आयुष्मान योजना का फायदा राज्य के केवल 14.96 लाख परिवारों को ही मिलेगा। हालांकि, पंजाब सरकार की योजना के तहत परिवारों को महज 50,000 रुपये का स्वास्थ्य बीमा मिलता है, जबकि आयुष्मान योजना में ये राशि पांच लाख रुपये है।

उधर, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी राज्य में पहले से लागू बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना को लाभार्थियों की संख्या के आधार पर आयुष्मान योजना से बेहतर बताया है। इसके तहत महिलाओं को सात लाख रुपये मिलते हैं। वहीं, एक साक्षात्कार में केरल के वित्त मंत्री थॉमस इसाक ने पूरी योजना को बहुत बड़ा धोखा करार दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 1,250 रुपये की प्रीमियम पर 33,000 रुपये का लाभ मिलता था, जबकि 1,110 रुपये के प्रीमियम पर पांच लाख रुपये का लाभ मिलेगा, लाभ में ऐसे उछाल संभव नहीं है। वहीं, तेलंगाना सरकार ने योजना को खारिज करते हुए कहा है कि इससे राज्य के महज 80 लाख परिवारों को फायदा होगा। जबकि राज्य में अभी लागू आरोग्यश्री योजना के दायरे में 70 फीसदी आबादी आती है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी योजना के दायरे में आने वाले परिवारों का सवाल उठाया है। उन्होंने कहा है कि छह लाख परिवार ही इस योजना के दायरे में आएंगे, जबकि दिल्ली में कुल परिवारों की संख्या 50 लाख है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 सितंबर को झारखंड से आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत की है। इसे दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सेवा योजना के रूप में पेश किया जा रहा है। फिलहाल इसे अभी 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश लागू कर रहे हैं। इसके जरिए 10 करोड़ परिवारों को पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मिलना है। इस योजना के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोग इसे मोदीकेयर योजना बता रहे हैं, लेकिन मेरे लिए यह गरीबों की सेवा करने का मौका है। प्रधानमंत्री ने बताया कि 5 लाख रुपये के खर्च में अस्पताल में भर्ती होने के अलावा जरूरी जांच, दवाई, भर्ती से पहले का खर्च और इलाज पूरा होने तक का खर्च शामिल है। इसके अलावा अगर किसी को पहले से कोई बीमारी है तो उस बीमारी का भी खर्च इस योजना के तहत उठाया जाएगा। हालांकि, इससे अलग होने वाले राज्यों ने ही नहीं, बल्कि विशेषज्ञों ने भी इस योजना के विस्तार को लेकर सवाल उठाए हैं।