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चीनी उत्पादन में ब्राजील से आगे होगा भारत


भारत अगले साल चीनी उत्पादन में ब्राजील को पीछे छोड़ देगा। भारत में 2018-19 में 3.5 करोड़ टन चीनी का उत्पादन होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इस दौरान ब्राजील का चीनी उत्पादन तीन करोड़ टन रहने का अनुमान है। 1990 के बाद पहली बार ब्राजील चीनी उत्पादन में पहले स्थान से नीचे आएगा। उसकी चीनी मिलें गन्ने को चीनी की जगह पर इथेनॉल उत्पादन पर खर्च कर रही हैं। ईंधन की बढ़ती कीमत को देखते हुए इसे ब्राजील के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। इसके मुकाबले भारत में चीनी मिलों की बायोफ्यूल उत्पादन की क्षमता कमजोर है।

हालांकि, भारत चीनी के अतिरिक्त उत्पादन से कैसे निपटेगा, ये बड़ा सवाल है। एक आकलन के मुताबिक कुल उत्पादित चीनी में खपत 2.5 करोड़ टन रहेगी। ऐसे में निर्यात को बढ़ाना ही सबसे अच्छा विकल्प माना जा रहा है। इसके लिए चीनी मिलों के संगठन ने सरकार से अगले विपणन वर्ष में चीनी मिलों के लिए 70 लाख टन चीनी का निर्यात अनिवार्य करने का अनुरोध किया है। इस साल मार्च में सरकार ने चीनी मिलों के लिए 20 लाख टन चीनी निर्यात अनिवार्य कर दिया था और हर एक मिल का कोटा भी तय कर दिया था। लेकिन मिलें अब तक पांच लाख टन चीनी का ही निर्यात कर पाई हैं।

चीनी मिलों के निर्यात में पिछड़ने की वजह सफेद चीनी का उत्पादन है, जिसकी वैश्विक बाजार में मांग कमजोर है। भारत में अभी केवल कुछ चीनी मिलें ही रॉ शुगर का उत्पादन करती हैं, जिसे वैश्विक बाजार में बेचना आसान होता है। वैश्विक बाजार में चीनी की गिरती कीमत भी बड़ी चिंता है। बीते महीने वैश्विक बाजार में चीनी की कीमतें दशक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं थीं। ऐसे में भारत से चीनी निर्यात बढ़ने से इसके दाम में और गिरावट आने का अनुमान है।