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चीनी उद्योग के लिए 5,500 करोड़ रुपये के पैकेज की मंजूरी

फोटो स्रोत- लाइव मिंट

केंद्र की मोदी सरकार ने चीनी उद्योग के लिए 5,500 करोड़ रुपये के एक और पैकेज को मंजूरी है। बुधवार को हुई कैबिनेट में ये फैसला किया गया। इसके तहत 2018-19 में 50 लाख टन चीनी के निर्यात के लिए मिलों को परिवहन सब्सिडी देने का फैसला किया गया है। पोर्ट से 100 किमी के दायरे में आने वाली मिलों को परिवहन, भाड़ा और देखभाल के शुल्क के रूप में प्रति टन 1,000 रुपये, जबकि इससे ज्यादा दूरी वाले समुद्र तटीय राज्यों की मिलों को प्रति टन 2,500 रुपये मिलेंगे। वहीं, गैर-तटीय राज्यों की चीनी मिलों को प्रति टन 3,000 रुपये या परिवहन के वास्तविक खर्च में जो कम हो, उसका भुगतान किया जाएगा।

कैबिनेट के फैसले के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि चीनी मिलों को परिवहन सब्सिडी के अलावा 2018-19 में प्रति क्विंटल गन्ने की पेराई पर 13.88 रुपये की वित्तीय सहायता भी दी जाएगी। बीते पेराई सत्र में चीनी मिलों को प्रति क्विंटल 5.5 रुपये सहायता दी गई थी। केंद्र के इस कदम को चीनी मिलों पर गन्ना किसानों के बढ़ते बकाए के बोझ को दूर करने की कवायद माना जा रहा है। मिलों पर किसानों के तकरीबन 13,000 करोड़ रुपये बकाया हैं। सरकार इस मुद्दे को विधानसभा और आम चुनाव को देखते हुए जल्द से जल्द सुलझाना चाहती है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के महानिदेशक अविनाश वर्मा ने कहा कि इससे उद्योग पर गन्ने की कीमत का दबाव हटाने में मदद मिलेगी।

केंद्र सरकार ने जून में चीनी उद्योग के लिए 8,500 करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान किया था। इसमें 4,440 करोड़ रुपये मिलों को सस्ते कर्ज के रूप में एथेनॉल क्षमता विकसित करने के लिए दिए गए थे। इसमें 1,332 करोड़ रुपये की ब्याज सहायता शामिल थी।