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विशेष चर्चा : क्या किसानों के बच्चे हासिल कर पाएंगे उच्च शिक्षा


अगर कोई किसान अपने बच्चे को पढ़ाना चाहे तो क्या वो पढ़ा पाएगा? ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि जेएनयू के छात्र जिस फीस बढ़ोतरी का विरोध कर रहे हैं अगर उसे लागू कर दिया गया तो वहां पढ़ने वाले 40 फीसदी बच्चे पढ़ाई के हक ही खो बैठेंगे. ये उन गरीब परिवारों के बच्चे हैं जिनकी मासिक आमदनी 12,000 रुपये से भी कम है. ऐसे में अगर जेएनयू जैसी सरकारी यूनिवर्सिटी कम खर्च में बच्चों को नहीं पढ़ाएंगी तो क्या किसान और गरीब घरों के बच्चे निजी संस्थाओं की भारी-भरकम फीस का खर्च उठा पाएंगे? ऐसे ही तमाम सवालों के साथ देखिए आज की हमारी ये विशेष चर्चा- कहीं छिन ना जाए सस्ती उच्च शिक्षा का ख्वाब?