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रसोई का बजट बिगाड़ेगी केरल की बाढ़, महंगे हुए मसाले

केरल की भीषण बाढ़ का असर अब बाकी इलाकों में भी दिखने लगा है। केरल में फसलें बर्बाद होने और आपूर्ति में रूकावट के चलते मसालों के दाम बढ़ने लगे हैं। यह महंगाई निश्चित रूप से रसोई का बजट और आपका जायका बिगाड़ेगी।

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अनंत यात्रा पर अटल, उमड़ा जन और भावनाओं का सैलाब

देश के पूर्व प्रधानमंत्री और जनप्रिय नेता अटल बिहारी वाजपेयी आज पंचतत्व में विलीन हो गए। नई दिल्ली के स्मृति स्थल पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर उनके अंतिम दर्शनों के लिए बड़ी भारी तादाद में आम से लेकर गणमान्य लोगों की भीड़ उमड़ी।

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मानसून को “सामान्य” बनाए रखने के सरकारी उपाय

मराठवाडा इलाके का परभाणी रूरल पुलिस थाना! कुछ किसान शिकायत दर्ज कराने पहुंचते हैं। उनका आरोप है कि मौसम विभाग के अधिकारियों ने खाद, बीज बेचने वाली कंपनियों के साथ सांठगांठ कर बारिश के अनुमान को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। मानसून अच्छा रहेगा, यह मानकर उन्होंने बुवाई कर दी। लेकिन बारिश कम हुई और उन्हें लाखों का नुकसान उठाना पड़ा।

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दिल्ली में भुखमरी से मौतें: कैसे ध्वस्त हुई खाद्य सुरक्षा?

आज से करीब पांच साल पहले देश की संसद में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून पास हुआ तो हेडलाइंस बनी थीं — अब देशवासियों को मिला भोजन का अधिकार। पिछले दिनों इसी संसद से महज 12-13 किलोमीटर दूर पूर्वी दिल्ली के मंडावली इलाके में तीन बच्चियों ने भुखमरी से दम तोड़ दिया।

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Kisan Mukti Bills Should Pave the Way to Resolve Agrarian Crisis

Being an agrarian society, Kisan andolans (movements by farmers) had a major role in keeping the farming community together which in turn, kept agriculture alive.

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Brewing Agony In India’s Tea Plantations

While India takes pride in hosting the single largest tea producing region in the world, the workers toiling in Assam’s tea plantations have been handed the worst deal in the country.

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Civil Society Demands Withdrawl of AP “Anti-People” Land Acquisition Amendment Bill

Various civil society organisations have come together to oppose the recent President’s assent granted to the amendments made in the Andhra Pradesh Land Acquisition Amendment Bill.

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How ‘Autonomy’ will kill the dream of an affordable and inclusive higher education

Higher education has always been limited to only a few in this country and the recent policy moves by the Government has increased the threat of education becoming more exclusive.

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Will India’s National Clean Air Program scare away pollution?

WHO report puts India under one of the most polluted countries in the world. It also puts New Delhi, Jaipur, Srinagar, Kanpur, Lucknow, Agra, Faridabad and Patna under the list of top 20 polluted cities in the world.

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तीन वार्षिक योजनाएं और हरित क्रांति

तीसरी पंचवर्षीय योजना में आसमानी आफत और पड़ोसियों के हमलों से देश में भारी तबाही का असर कृषि पर सबसे ज्यादा पड़ा था। कृषि क्षेत्र के लिए पांच साल की लंबी अवधि की सरकारी योजनाएं सुचारू रूप् से चला पाने में मुश्किल दिख रही थी।

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Is “Normal” Monsoon a Decent Indicator of Good Agricultural Output?

Recently, the India Meteorological Department (IMD) made the forecast that rainfall in June-September period is likely to be at 97 per cent of long period average (LPA).

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Difficult Days for Bundelkhand

May 18 was a day of taking a tough decision for the Sahariya tribals living in Laalon village (Talbehat block of Lalitpur district, Uttar Pradesh).

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बैगाओं की ख़ास खेती- बेंवर

बैगा आदिवासियों की विशेष जीवन शैली और कम संख्या को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें ‘राष्ट्रीय मानव’ घोषित किया गया है। इसलिए मध्य प्रदेश में बैगा विकास प्राधिकरण बनाकर विकास की खास योजनाएं भी बनाई जा रही हैं।

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Improving Educational Attainments is Critical for Human Development but, Where Have We Gone Wrong?

Educational progress precedes socioeconomic development which is why every country has heavily invested in its education system.

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जब हरित क्रांति की नींव पड़ी

पहली योजना की आश्चर्यजनक सफलता के बाद योजना आयोग ने अपना ध्यान कृषि के साथ साथ उद्योग के विस्तार पर भी केंद्रित करने का निर्णय लिया। माना गया कि कृषि के मामले में पहली योजना में उम्मीद से बहुत ज्यादा हासिल हो ही चुका है

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इतिहास सुझा सकता है कुछ समाधान

खेती-किसानी की बदहाली पर चिंता कुछ ज़्यादा ही बढ़ गई है। चूंकि पिछले दशकों में किसानों की जी-तोड़ मेहनत से कृषि उत्पादन खूब बढ़ा है, इसीलिए ये सवाल दुखद और आश्चर्यजनक है कि इस समय किसान क्यों बदहाल हैं?

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Sagarmala Project in Murky Waters

Tapping the ‘blue economy’ has been quite high on Prime Minister Narendra Modi’s agenda, and the centerpiece of it all has been the ambitious Sagarmala project. But, a recent report by ICRA, a Moody’s Investor Service Company, raises some serious concern over its financial viability.

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A Pest, A Crop, and A Thousand Questions

What do we plant next year? It’s a question that would confront tens of thousands of cotton farmers in India in the coming days. The year gone by was a bitter experience. The year ahead raises critical questions.

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ग्रामीण विकास की समग्र समझ बने

ग्रामीण विकास के विभिन्न पक्षों- जैसे कृषि, गैर-कृषि रोजगार, पर्यावरण की रक्षा और समाज-सुधार आदि पर अलग-अलग विचार होता रहा है। यह अपने में उपयोगी हो सकता है, पर इससे समग्र नियोजन में कठिनाई भी आती है।

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“Crop Insurance Schemes: Dismally Inefficient And Poorly Implemented”

While the Government is pushing for insurance schemes in the agricultural sector, a Comptroller and Auditor General of India (CAG) audit report points towards some glaring flaws in the implementation of such schemes in the state of Himachal Pradesh.

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This Ground Report Brings You Some Bitter Realities of Karnataka Elections

With the eyes of the entire nation on it, Karnataka went for elections yesterday. The much awaited results of the state’s Assembly elections are widely being held as an indicator of what lies in store in the 2019 general elections.

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A Cowshed of Their Own

Bandana was a rebel she didn’t quite intend to be. Before her parents could fix her marriage, the pahadi girl chose a partner on her own. This had never happened in the history of her huge family.

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उत्तर प्रदेश सरकार की पोल खोलते आंकड़े

राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे की को गलत बताते हुए जनता के बीच जाती हैं और खुद को तमाम परेशानियों के समाधान के रूप में पेश करके वोट लेती हैं। भारतीय जनता पार्टी ने भी समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस की कमियों का सहारा लेकर उत्तर प्रदेश की जनता का मत हासिल किया और सरकार बनाई।

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SC vouches for ‘Free Will’, but isn’t it our Constitutional Right?

Upholding the right of adults to choose whom they want to live with, the Supreme Court has ruled that a consenting adult couple can be in a live-in relationship, even if the man is below 21 years of age.

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संकट में नर्मदा नदी

मध्य प्रदेश से लेकर गुजरात तक एक बड़े भू-भाग की जीवन रेखा नर्मदा नदी है। पर अब नर्मदा का यह सत्य खो गया है। उसके विशाल चौड़ाई वाले पाट अब उजाड़ और खुदे हुए हैं। कहीं-कहीं नर्मदा एक पतली सी जलधारा के रूप में मंद गति से बहती हुई नज़र आती है।

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आज बहुत याद आते हैं डॉ. रिछारिया

मौजूदा खेती-किसानी के संकट के बीच जब हम सही नीतियों और तकनीक की तलाश करते हैं, तो हमें एक शीर्ष के कृषि वैज्ञानिक बहुत याद आते हैं, क्योंकि उन्होंने जो सीखा और सिखाया एवं जिस के लिए संघर्षरत रहे, उस ज्ञान के आधार पर आज खेती-किसानी के संकट के समाधान में सहायता मिल सकती है।

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महत्त्वपूर्ण वो नज़रिया है!

शीत युद्ध के दौर में मार्क्सवाद दुनिया के लगभग हर देश में एक वैचारिक ध्रुव बना रहता था। तब एक प्रवृत्ति उस विचारधारा में दुनिया के तमाम मसलों का हल देखने की थी। जबकि दूसरी तरफ़ उसे लांछित करने और उसे क्रूर तानाशाही व्यवस्था का जनक करार देने वाले लोग थे। आज ये ध्रुवीकरण उतना तीखा नहीं है।

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Indigenous Seeds Denied Recognition

India underwent an agricultural transformation during the 1960’s. The Third Five Year Plan (1961-66) brought along with it “Green Revolution”, a new agrarian strategy which is often credited for revolutionizing the farming practices of the country.

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चित्रकारों का गांव: पाटनगढ़

संभावना तो यही थी कि यह भी दूसरे आदिवासी गांवों की तरह ही होता: सौ-दो सौ लोगों की उजड़ी-उजड़ी सी बस्ती जैसा। झोपड़ियों में बसने वाले सीधे-सरल लोगों का सहमा-सहमा सा गांव। पर, प्रकृति-पुत्रों की नैसर्गिक कला ने पाटनगढ़ को एक ख़ास पहचान दे दी है। अब तमाम शहरों के लोग भी इस गांव के आगे लंबी कतार लगाते हैं।

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FRDI Bill, Cash Hoarding Leave ATM’s Dry, Say Experts

In a deja vu, India is yet again staring at a severe cash crunch with ATM’s running dry. For the past few weeks, more than seven states have been forced to relive the horrors of demonetization, which barely completes 18 months, due to unavailability of cash in ATM’s.

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Direct Income Support over MSP? Maybe, Not!

The Indian Council for Research on International Economic Relations (ICRIER) has suggested a crop-neutral Direct Income/Investment Support (DIS) claiming it to be better than making procurements at Minimum Support Price(MSP).

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We will not be India’s Daughter!

The question of sexual violence, its systemic nature, its links to political power, its role in nation and community building, have all been thrown back to us with the rape and murder of the eight-year old girl in Kathua in January.

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Save the Sheep not the Wolves, Mr. Finance Minister!

While presenting the budget Finance Minister Arun Jaitley told the Parliament that his government will ensure the income of farmers will double by 2022 as agriculture will go onto be projected as an enterprise.

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Legislating the coast

On the 18th of April 2018, the Center released a new draft of the Coastal Regulation Zone (CRZ) Notification(2018) for comments.

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जितनी बड़ी जाति, उतनी लंबी उम्र?

ऊंच-नीच के सोपानक्रम (hierarchy) पर टिकी जाति-व्यवस्था और मनुष्य के स्वास्थ्य एवं आयु सीमा के बीच क्या संबंध है? क्या इस सोपानक्रम के आधार पर ये अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि आपकी उम्र क्या होगी?

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Discontented Farmers to Start Fresh Agitation from June 1

Angry with the governments turning a blind eye towards their demands, farmers from five states have decided to launch massive strikes from June 1 on the lines of ‘Kisan Long March’.

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एक अनोखा आयोजनः राष्ट्रीय बैगा ओलिंपिक

मध्य प्रदेश में तीन आदिम जन-जातियां निवास करती हैं। महाकोशल इलाके के मंडला, डिंडौरी, शहडोल, उमरिया अनूपपुर और बालाघाट ज़िलों में बैबा जनजाति, चंबल क्षेत्र में सहरिया और छिंदवाड़ा के पातालकोट में भारिया।

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Migrants Missing from the Migration Discourse

Abducted by the terrorist group ISIS, dead bodies of 38 Indians arrived in Amritsar from Mosul, Iraq on April 1.

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Lost in the Fields

In an invigorating trend emerging from the Economic Survey of India, 2018, India is undergoing rapid “Feminization of agriculture” for the past few years.

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कोयला उद्योग: निजीकरण के साइड इफेक्ट्स

भारतीय कोयला उद्योग में निजी भागीदारी के फैसले के साइड इफेक्ट्स आने शुरू हो गए हैं। निजी कंपनियों से मुक़ाबले की आड़ में सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के कोयला उद्योग में वह सब कुछ करने को आतुर है, जिसे वह आम तौर पर नहीं कर पाती। मसलन, अलाभकारी कोयला खानों को बंद करने की कवायदें शुरू हो गई हैं।

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The Not-So "Green" Revolution

While Green Revolution has often been touted as one of the biggest revolutions in India’s farming history, hard hitting evidences proving otherwise, continue to pour in from several parts of the country.

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मुंबई के लिए छीना गांवों का पानी

महाराष्ट्र सरकार की प्राथमिकताएं आदिवासियों और दूसरे ग्रामीणों को भारी पड़ रही हैं। इस कारण हज़ारों ग्रामीणों के लिए प्यास बुझाना रोज़मर्रा की जंग बन गया है। अगर आप मुंबई के आस-पास गांवों का दौरा करें, तो पहली नज़र में ये साफ़ हो जाएगा कि सरकार की प्राथमिकता मुंबईवासियों को निर्बाध पानी मुहैया कराना है।

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Farm Distress: Govt Bundles Old Measures in New Schemes

In a bid to please the agitated and distressed farmers, the central government is now mulling plans for introducing new schemes intended to compensate the farmers when the market prices of their crops fall below the prescribed MSP.

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Mumbai savours water; tribals left longing for a droplet

Is Maharashtra Governments water policy anti-tribal and anti-villagers? Well a visit to the surrounding rural areas of Mumbai confirms to this query.

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मछुआरों को मार डालने की नीति!

जब तक नदियां बहती रहती हैं, उनके जल पर समाज का अधिकार बना रहता है। पर जैसे ही उन पर बांध बन जाते हैं, नदियों को सरकारी जायदाद मान लिया जाता है। उनसे ख़रीदने-बेचने और हड़पने के स्वार्थ जुड़ जाते हैं। यही सब इन दिनों मध्य प्रदेश में बने विभिन्न बांधों और जलाशयों के साथ हो रहा है।

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The Significance of the ‘Long March’

The recent week-long farmer’s march from Nashik to Mumbai under the inspiring leadership of the All India Kisan Sabha (AIKS), was truly impressive in many ways.

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Democracy : More than a form of government

These are no ordinary times to revisit Dr B. R. Ambedkar's legacy. We have before us an India where, in the words of Prof Achin Vanaik, “the centre of gravity has shifted perhaps decisively to the right, in three crucial spheres : economy, secularism and democracy”.

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जायज़ है दलितों का अंदेशा

हाथरस के रहने वाले संजय कुमार की शादी कासगंज ज़िले के निज़ामपुर गांव की शीतल से तय हुई। यूं तो 130 करोड़ की आबादी वाले देश में हज़ारों शादियां रोज़ होती हैं, लेकिन संजय की शादी एक राष्ट्रीय मुद्दा बन गई, क्योंकि संजय कुमार दलित हैं।

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‘Towards enlightened, inclusive India’ from a ‘Bahishkrut’ India

What was Dr. Ambedkar's vision for an independent India or how he looked at a future roadmap for India?

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Tracking Negative Employment-Growth in India

Playing a spoilsport to the chest thumping by the Modi Government over country’s rising Gross Domestic Product (GDP) growth which stood at 7.4 and 8.2 percent for 2014-15 and 2015-16 respectively, the Reserve Bank of India (RBI) has released numbers painting a worrisome picture of growth of jobs in the country.

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