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रसोई का बजट बिगाड़ेगी केरल की बाढ़, महंगे हुए मसाले

केरल की भीषण बाढ़ का असर अब बाकी इलाकों में भी दिखने लगा है। केरल में फसलें बर्बाद होने और आपूर्ति में रूकावट के चलते मसालों के दाम बढ़ने लगे हैं। यह महंगाई निश्चित रूप से रसोई का बजट और आपका जायका बिगाड़ेगी।

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अनंत यात्रा पर अटल, उमड़ा जन और भावनाओं का सैलाब

देश के पूर्व प्रधानमंत्री और जनप्रिय नेता अटल बिहारी वाजपेयी आज पंचतत्व में विलीन हो गए। नई दिल्ली के स्मृति स्थल पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर उनके अंतिम दर्शनों के लिए बड़ी भारी तादाद में आम से लेकर गणमान्य लोगों की भीड़ उमड़ी।

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मानसून को “सामान्य” बनाए रखने के सरकारी उपाय

मराठवाडा इलाके का परभाणी रूरल पुलिस थाना! कुछ किसान शिकायत दर्ज कराने पहुंचते हैं। उनका आरोप है कि मौसम विभाग के अधिकारियों ने खाद, बीज बेचने वाली कंपनियों के साथ सांठगांठ कर बारिश के अनुमान को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। मानसून अच्छा रहेगा, यह मानकर उन्होंने बुवाई कर दी। लेकिन बारिश कम हुई और उन्हें लाखों का नुकसान उठाना पड़ा।

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दिल्ली में भुखमरी से मौतें: कैसे ध्वस्त हुई खाद्य सुरक्षा?

आज से करीब पांच साल पहले देश की संसद में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून पास हुआ तो हेडलाइंस बनी थीं — अब देशवासियों को मिला भोजन का अधिकार। पिछले दिनों इसी संसद से महज 12-13 किलोमीटर दूर पूर्वी दिल्ली के मंडावली इलाके में तीन बच्चियों ने भुखमरी से दम तोड़ दिया।

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Kisan Mukti Bills Should Pave the Way to Resolve Agrarian Crisis

Being an agrarian society, Kisan andolans (movements by farmers) had a major role in keeping the farming community together which in turn, kept agriculture alive.

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Brewing Agony In India’s Tea Plantations

While India takes pride in hosting the single largest tea producing region in the world, the workers toiling in Assam’s tea plantations have been handed the worst deal in the country.

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Civil Society Demands Withdrawl of AP “Anti-People” Land Acquisition Amendment Bill

Various civil society organisations have come together to oppose the recent President’s assent granted to the amendments made in the Andhra Pradesh Land Acquisition Amendment Bill.

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How ‘Autonomy’ will kill the dream of an affordable and inclusive higher education

Higher education has always been limited to only a few in this country and the recent policy moves by the Government has increased the threat of education becoming more exclusive.

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Will India’s National Clean Air Program scare away pollution?

WHO report puts India under one of the most polluted countries in the world. It also puts New Delhi, Jaipur, Srinagar, Kanpur, Lucknow, Agra, Faridabad and Patna under the list of top 20 polluted cities in the world.

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तीन वार्षिक योजनाएं और हरित क्रांति

तीसरी पंचवर्षीय योजना में आसमानी आफत और पड़ोसियों के हमलों से देश में भारी तबाही का असर कृषि पर सबसे ज्यादा पड़ा था। कृषि क्षेत्र के लिए पांच साल की लंबी अवधि की सरकारी योजनाएं सुचारू रूप् से चला पाने में मुश्किल दिख रही थी।

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Is “Normal” Monsoon a Decent Indicator of Good Agricultural Output?

Recently, the India Meteorological Department (IMD) made the forecast that rainfall in June-September period is likely to be at 97 per cent of long period average (LPA).

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Difficult Days for Bundelkhand

May 18 was a day of taking a tough decision for the Sahariya tribals living in Laalon village (Talbehat block of Lalitpur district, Uttar Pradesh).

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बैगाओं की ख़ास खेती- बेंवर

बैगा आदिवासियों की विशेष जीवन शैली और कम संख्या को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें ‘राष्ट्रीय मानव’ घोषित किया गया है। इसलिए मध्य प्रदेश में बैगा विकास प्राधिकरण बनाकर विकास की खास योजनाएं भी बनाई जा रही हैं।

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Improving Educational Attainments is Critical for Human Development but, Where Have We Gone Wrong?

Educational progress precedes socioeconomic development which is why every country has heavily invested in its education system.

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जब हरित क्रांति की नींव पड़ी

पहली योजना की आश्चर्यजनक सफलता के बाद योजना आयोग ने अपना ध्यान कृषि के साथ साथ उद्योग के विस्तार पर भी केंद्रित करने का निर्णय लिया। माना गया कि कृषि के मामले में पहली योजना में उम्मीद से बहुत ज्यादा हासिल हो ही चुका है

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इतिहास सुझा सकता है कुछ समाधान

खेती-किसानी की बदहाली पर चिंता कुछ ज़्यादा ही बढ़ गई है। चूंकि पिछले दशकों में किसानों की जी-तोड़ मेहनत से कृषि उत्पादन खूब बढ़ा है, इसीलिए ये सवाल दुखद और आश्चर्यजनक है कि इस समय किसान क्यों बदहाल हैं?

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Sagarmala Project in Murky Waters

Tapping the ‘blue economy’ has been quite high on Prime Minister Narendra Modi’s agenda, and the centerpiece of it all has been the ambitious Sagarmala project. But, a recent report by ICRA, a Moody’s Investor Service Company, raises some serious concern over its financial viability.

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A Pest, A Crop, and A Thousand Questions

What do we plant next year? It’s a question that would confront tens of thousands of cotton farmers in India in the coming days. The year gone by was a bitter experience. The year ahead raises critical questions.

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ग्रामीण विकास की समग्र समझ बने

ग्रामीण विकास के विभिन्न पक्षों- जैसे कृषि, गैर-कृषि रोजगार, पर्यावरण की रक्षा और समाज-सुधार आदि पर अलग-अलग विचार होता रहा है। यह अपने में उपयोगी हो सकता है, पर इससे समग्र नियोजन में कठिनाई भी आती है।

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“Crop Insurance Schemes: Dismally Inefficient And Poorly Implemented”

While the Government is pushing for insurance schemes in the agricultural sector, a Comptroller and Auditor General of India (CAG) audit report points towards some glaring flaws in the implementation of such schemes in the state of Himachal Pradesh.

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This Ground Report Brings You Some Bitter Realities of Karnataka Elections

With the eyes of the entire nation on it, Karnataka went for elections yesterday. The much awaited results of the state’s Assembly elections are widely being held as an indicator of what lies in store in the 2019 general elections.

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A Cowshed of Their Own

Bandana was a rebel she didn’t quite intend to be. Before her parents could fix her marriage, the pahadi girl chose a partner on her own. This had never happened in the history of her huge family.

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उत्तर प्रदेश सरकार की पोल खोलते आंकड़े

राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे की को गलत बताते हुए जनता के बीच जाती हैं और खुद को तमाम परेशानियों के समाधान के रूप में पेश करके वोट लेती हैं। भारतीय जनता पार्टी ने भी समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस की कमियों का सहारा लेकर उत्तर प्रदेश की जनता का मत हासिल किया और सरकार बनाई।

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SC vouches for ‘Free Will’, but isn’t it our Constitutional Right?

Upholding the right of adults to choose whom they want to live with, the Supreme Court has ruled that a consenting adult couple can be in a live-in relationship, even if the man is below 21 years of age.

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संकट में नर्मदा नदी

मध्य प्रदेश से लेकर गुजरात तक एक बड़े भू-भाग की जीवन रेखा नर्मदा नदी है। पर अब नर्मदा का यह सत्य खो गया है। उसके विशाल चौड़ाई वाले पाट अब उजाड़ और खुदे हुए हैं। कहीं-कहीं नर्मदा एक पतली सी जलधारा के रूप में मंद गति से बहती हुई नज़र आती है।

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आज बहुत याद आते हैं डॉ. रिछारिया

मौजूदा खेती-किसानी के संकट के बीच जब हम सही नीतियों और तकनीक की तलाश करते हैं, तो हमें एक शीर्ष के कृषि वैज्ञानिक बहुत याद आते हैं, क्योंकि उन्होंने जो सीखा और सिखाया एवं जिस के लिए संघर्षरत रहे, उस ज्ञान के आधार पर आज खेती-किसानी के संकट के समाधान में सहायता मिल सकती है।

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महत्त्वपूर्ण वो नज़रिया है!

शीत युद्ध के दौर में मार्क्सवाद दुनिया के लगभग हर देश में एक वैचारिक ध्रुव बना रहता था। तब एक प्रवृत्ति उस विचारधारा में दुनिया के तमाम मसलों का हल देखने की थी। जबकि दूसरी तरफ़ उसे लांछित करने और उसे क्रूर तानाशाही व्यवस्था का जनक करार देने वाले लोग थे। आज ये ध्रुवीकरण उतना तीखा नहीं है।

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Indigenous Seeds Denied Recognition

India underwent an agricultural transformation during the 1960’s. The Third Five Year Plan (1961-66) brought along with it “Green Revolution”, a new agrarian strategy which is often credited for revolutionizing the farming practices of the country.

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चित्रकारों का गांव: पाटनगढ़

संभावना तो यही थी कि यह भी दूसरे आदिवासी गांवों की तरह ही होता: सौ-दो सौ लोगों की उजड़ी-उजड़ी सी बस्ती जैसा। झोपड़ियों में बसने वाले सीधे-सरल लोगों का सहमा-सहमा सा गांव। पर, प्रकृति-पुत्रों की नैसर्गिक कला ने पाटनगढ़ को एक ख़ास पहचान दे दी है। अब तमाम शहरों के लोग भी इस गांव के आगे लंबी कतार लगाते हैं।

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FRDI Bill, Cash Hoarding Leave ATM’s Dry, Say Experts

In a deja vu, India is yet again staring at a severe cash crunch with ATM’s running dry. For the past few weeks, more than seven states have been forced to relive the horrors of demonetization, which barely completes 18 months, due to unavailability of cash in ATM’s.

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Direct Income Support over MSP? Maybe, Not!

The Indian Council for Research on International Economic Relations (ICRIER) has suggested a crop-neutral Direct Income/Investment Support (DIS) claiming it to be better than making procurements at Minimum Support Price(MSP).

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We will not be India’s Daughter!

The question of sexual violence, its systemic nature, its links to political power, its role in nation and community building, have all been thrown back to us with the rape and murder of the eight-year old girl in Kathua in January.

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Save the Sheep not the Wolves, Mr. Finance Minister!

While presenting the budget Finance Minister Arun Jaitley told the Parliament that his government will ensure the income of farmers will double by 2022 as agriculture will go onto be projected as an enterprise.

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Legislating the coast

On the 18th of April 2018, the Center released a new draft of the Coastal Regulation Zone (CRZ) Notification(2018) for comments.

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जितनी बड़ी जाति, उतनी लंबी उम्र?

ऊंच-नीच के सोपानक्रम (hierarchy) पर टिकी जाति-व्यवस्था और मनुष्य के स्वास्थ्य एवं आयु सीमा के बीच क्या संबंध है? क्या इस सोपानक्रम के आधार पर ये अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि आपकी उम्र क्या होगी?

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Discontented Farmers to Start Fresh Agitation from June 1

Angry with the governments turning a blind eye towards their demands, farmers from five states have decided to launch massive strikes from June 1 on the lines of ‘Kisan Long March’.

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एक अनोखा आयोजनः राष्ट्रीय बैगा ओलिंपिक

मध्य प्रदेश में तीन आदिम जन-जातियां निवास करती हैं। महाकोशल इलाके के मंडला, डिंडौरी, शहडोल, उमरिया अनूपपुर और बालाघाट ज़िलों में बैबा जनजाति, चंबल क्षेत्र में सहरिया और छिंदवाड़ा के पातालकोट में भारिया।

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Migrants Missing from the Migration Discourse

Abducted by the terrorist group ISIS, dead bodies of 38 Indians arrived in Amritsar from Mosul, Iraq on April 1.

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Lost in the Fields

In an invigorating trend emerging from the Economic Survey of India, 2018, India is undergoing rapid “Feminization of agriculture” for the past few years.

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कोयला उद्योग: निजीकरण के साइड इफेक्ट्स

भारतीय कोयला उद्योग में निजी भागीदारी के फैसले के साइड इफेक्ट्स आने शुरू हो गए हैं। निजी कंपनियों से मुक़ाबले की आड़ में सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के कोयला उद्योग में वह सब कुछ करने को आतुर है, जिसे वह आम तौर पर नहीं कर पाती। मसलन, अलाभकारी कोयला खानों को बंद करने की कवायदें शुरू हो गई हैं।

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The Not-So "Green" Revolution

While Green Revolution has often been touted as one of the biggest revolutions in India’s farming history, hard hitting evidences proving otherwise, continue to pour in from several parts of the country.

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मुंबई के लिए छीना गांवों का पानी

महाराष्ट्र सरकार की प्राथमिकताएं आदिवासियों और दूसरे ग्रामीणों को भारी पड़ रही हैं। इस कारण हज़ारों ग्रामीणों के लिए प्यास बुझाना रोज़मर्रा की जंग बन गया है। अगर आप मुंबई के आस-पास गांवों का दौरा करें, तो पहली नज़र में ये साफ़ हो जाएगा कि सरकार की प्राथमिकता मुंबईवासियों को निर्बाध पानी मुहैया कराना है।

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Farm Distress: Govt Bundles Old Measures in New Schemes

In a bid to please the agitated and distressed farmers, the central government is now mulling plans for introducing new schemes intended to compensate the farmers when the market prices of their crops fall below the prescribed MSP.

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Mumbai savours water; tribals left longing for a droplet

Is Maharashtra Governments water policy anti-tribal and anti-villagers? Well a visit to the surrounding rural areas of Mumbai confirms to this query.

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मछुआरों को मार डालने की नीति!

जब तक नदियां बहती रहती हैं, उनके जल पर समाज का अधिकार बना रहता है। पर जैसे ही उन पर बांध बन जाते हैं, नदियों को सरकारी जायदाद मान लिया जाता है। उनसे ख़रीदने-बेचने और हड़पने के स्वार्थ जुड़ जाते हैं। यही सब इन दिनों मध्य प्रदेश में बने विभिन्न बांधों और जलाशयों के साथ हो रहा है।

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The Significance of the ‘Long March’

The recent week-long farmer’s march from Nashik to Mumbai under the inspiring leadership of the All India Kisan Sabha (AIKS), was truly impressive in many ways.

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Democracy : More than a form of government

These are no ordinary times to revisit Dr B. R. Ambedkar's legacy. We have before us an India where, in the words of Prof Achin Vanaik, “the centre of gravity has shifted perhaps decisively to the right, in three crucial spheres : economy, secularism and democracy”.

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जायज़ है दलितों का अंदेशा

हाथरस के रहने वाले संजय कुमार की शादी कासगंज ज़िले के निज़ामपुर गांव की शीतल से तय हुई। यूं तो 130 करोड़ की आबादी वाले देश में हज़ारों शादियां रोज़ होती हैं, लेकिन संजय की शादी एक राष्ट्रीय मुद्दा बन गई, क्योंकि संजय कुमार दलित हैं।

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‘Towards enlightened, inclusive India’ from a ‘Bahishkrut’ India

What was Dr. Ambedkar's vision for an independent India or how he looked at a future roadmap for India?

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Tracking Negative Employment-Growth in India

Playing a spoilsport to the chest thumping by the Modi Government over country’s rising Gross Domestic Product (GDP) growth which stood at 7.4 and 8.2 percent for 2014-15 and 2015-16 respectively, the Reserve Bank of India (RBI) has released numbers painting a worrisome picture of growth of jobs in the country.

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Mythologise the Man, Marginalise his Meaning!

It was the year 1927 when the historic struggle for civil rights took place under the leadership of Dr B. R. Ambedkar in Mahad, then part of Bombay province, when thousands of Dalits and fellow travellers went to a public pond in Mahad and drank water from it.

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Fee For Service: Approaching Trouble for Patients and Doctors?

A private hospital in Kolkata has recently announced that it will be paying "Fee-For-Service" (FFS) to most of its doctors instead of giving them monthly salaries.

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The Curious Case of MGNREGA wages

Mocking the economic condition of the distressed rural working community, the Union Government has decided to uphold the low wage rates for ten states paid under the Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (MGNREGA) for 2018-19.

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Fish Workers in Kutch Caught in Severe Debt Bondage

Situated at the edge of the Rann of Kutch, once an old port city which hosted a grand fort, the village of Lakhpat now stands almost deserted.

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Land Trouble Behind Farmers’ Woes in Himachal

The streets of quaint town of Shimla turned red on April 3 as thousands of farmers from the state marched towards the state Vidhan Sabha.

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Linking Organic Farmers to Consumers

In the context of the crisis situation of farmers, the most discussed issue has been the extent to which the procurement price can be increased. However a neglected issue which may be even more important is the extent to which the farming costs can be decreased.

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Landlessness is the Root Cause of Dalits' Marginalisation

Writing a new chapter in the struggle for the much denied dignity, millions of people from historically discriminated castes marched on the roads throughout the breadth and width of the nation almost bringing the country to a halt, living up to their call of a complete ‘Bharat Bandh’.

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आंध्र प्रदेश : हथकरघा कर्मियों से क्रूर मज़ाक

परंपरागत आजीविका के क्षेत्र में हथकरघा एक मुख्य व्यवसाय रहा है। इस क्षेत्र पर आज भी करोड़ों लोगों की आजीविका निर्भर है। यह प्रदूषण रहित है क्योंकि इसमें न्यूनतम बिजली की खपत होती है। यह व्यक्ति के श्रम से विभिन्न जीवन-शैलियों के मुताबिक अच्छे कपड़े पैदा करके आजीविका और संस्कृतियों को बचाने का एक ज़रिया है।

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Farmers' Anger on Boil in Gujarat

Tear gas shells fired, lathi charged injuring at least 10, 50 protestors detained; read several headlines from news stories coming from Gujarat.

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ग्रामीण विकास मंत्री को नरेगा संघर्ष मोर्चा का खुला ख़त

कई राज्यों में इस वक़्त मनरेगा की मज़दूरी दर वहां की न्यूनतम मज़दूरी से काफी कम है। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार ये कहा है कि न्यूनतम मज़दूरी से कम भुगतान करना 'बंधुआ मज़दूरी' के दायरे में आएगा।

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Farmers in Kannur Caught in Political Crossfire

Amidst ongoing agrarian distress in the country, farmers of Keezhattur village in Kerela’s Kannur district have found themselves in another crisis.

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Shallow Solutions To Much Deeper Problems

Once considered national pride, farmers of the country find themselves in deep crisis today. And it is high time to recognise it as a national crisis, no matter how glossy a picture is painted by the mainstream media and the various governments.

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Tractor Trouble for Western UP’s Farmers

"There will not be any traffic in Delhi, there will be only tractors standing on the roads of the capital. Old tractors will bring life to a standstill", warned Rakesh Tikait, national spokesperson of Bharatiya Kisan Union (BKU) reacting to National Green Tribunal's (NGT) ban on tractors that are more than 10-years old.

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Bills by the farmers will

Pushing the government in the corner once again, the farmers of the country represented by the All India Kisan Sangharsh coordination Committee (AIKSCC) have penned down two draft bills, which they want to be enacted as legislation. The prime demands raised in the bills are absolute loan waivers for farmers and guaranteed remunerative minimum support prices for all crops.

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Agriculture in Punjab: Is budgetary morale booster enough?

The Government of Punjab has allocated Rs. 14,370 crore to its Agriculture sector in its 2018-19 budget, a move which might provide a sigh of relief to the otherwise deeply distressed farmers of the state. The budgetary allocation meant for the State’s agrarian economy this fiscal is a 40% hike compared to Rs. 10, 541 crore for 2017-18.

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The Filthy Reality of Swachh Bharat

If you visit the Swachh Bharat website or check its’ twitter handle, you will find several colorful materials. You will see superstar Shahrukh Khan endorsing Swachh Bharat.

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Credit to Agriculture: From Nationalisation to the dreaded Privatization

During the last few weeks, late Indira Gandhi was remembered with an unnatural frequency and unusual vigour on our news studios. The backdrop was the recent Nirav Modi scam that has rocked the nation and the former Prime Minster found herself being blamed for the Rs 11,400 crore fraud.

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मुद्दे उठे, लेकिन असर?

भूमि अधिकार आंदोलन ने बेहद ज़रूरी पहल की। उसने दिल्ली में ‘कृषि संकट, गौवंश से जुड़ी अर्थव्यवस्था पर चोट और दलित-अल्पसंख्यकों पर हमले’ विषय पर दो दिन के राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया।

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Dismayed by Government presenting already debunked claims: Right to Food Campaign

As the government began its defense of Aadhaar in the Supreme Court on March 21, The Right to Food Campaign has slammed the Government’s denial on the limitations of Aadhar.

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कोलगेट 2.0: कोयला घोटालों का नया अवतार

कायदे-कानूनों से बेपरवाह चर्चित अडानी समूह का कोयले के कारोबार में जलवा बरकरार है। इस समूह की कंपनियां राज्य सरकारों की कंपनियों से साझेदारी करके मालामाल हो रही हैं। वित्तीय अनियमितताओं के उजागर होने के बावजूद उनकी सेहत पर असर नहीं है।

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Villages paying the price of failing urban waste management

Last week, the Maharashtra Assembly rocked with the demands to suspend the Aurangabad Police Commissioner Yashasvi Yadav. It was under Yadav’s supervision that the police had beaten up a group of protestors not even sparing women and children.

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India witnessing a historic working class women struggle

We are currently witnessing a historic and militant struggle by working class women across the country.

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Troubled Waters for Gujarat’s fish workers

With its 1600 sq. km, long coastline, the longest for any state, Gujarat has reportedly been recording highest marine fish catch for four consecutive years. In 2016 with 7.74 lakh tonnes of catch, Gujarat produced an enviable number with many states coastal states lagging far behind.

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मोदी सरकार की एक ‘टॉप प्रायोरिटी’ का हाल

फल और सब्जियां पैदा करने वाले किसान भी हमारे लिए टॉप प्रायोरिटी में है। और जब मैं टॉप कहता हूं, तो हिंदुस्तान के किसी भी कोने में जाइए... तीन सब्ज़ियां जरूर नजर आएंगी। टोमैटो, अनियन और पोटैटो - नरेंद्र मोदी

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Tribal Voices: Fifth Schedule or a New Nandigram?

A new agitation is emerging in tribal areas of Madhya Pradesh. It’s against the acquisition of fertile land of 32 villages for establishment of Ultratech Cement factory in Manawar, district Dhar.

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को डॉक्टरों का खुला ख़त

राष्ट्रीय पोषण मिशन में सरकार ने ऐलान किया था कि 2010 तक बच्चों की कम वृद्धि, अल्प-पोषण और कम वज़न को सालाना 2 फ़ीसदी की दर से कम करना है। लेकिन, कामकाजी महिलाओं, ख़ासकर असंगठित क्षेत्र की महिलाओं को मातृत्व अवकाश नहीं मिलने के चलते ये योजना खटाई में पड़ सकती है।

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कोयला उद्योग में बेदम मजदूर आंदोलन

कोयला उद्योग में मजदूर आंदोलन हांफ रहा है। दम इसलिए नहीं टूटा कि मजदूरों का जज्बा बरकार है।

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संयोग नहीं है ये बदहाली

ग्रामीण भारत की बदहाली के बारे में मशहूर पत्रिका इकॉनोमिक एंड पोलिटिकल वीकली (ईपीडब्लू- 3 मार्च 2018) में छपे विशेष आलेख में एक अहम तथ्य का जिक्र हुआ है।

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Will Now FOBs Really Give Priority to Priority Sectors?

Last Thursday, Reserve Bank of India (RBI) issued a circular reaffirming that foreign owned banks (FOBs), having over 20 branches in India, meet sub-targets for loans to small and marginal farmers in priority sector lending.

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दलित-आदिवासियों के लिए गेट बंद

कुछ चीजें बदस्तूर वैसी ही जारी रहती हैं- फिर कॉरपोरेट क्षेत्र हो या अन्य निजी उद्यम हो! मिसाल के तौर पर भारत ने ‘ईज आफ डूइंग बिजनेस’ यानी बिजनेस करने की सहूलियत में भले ही अपनी रैंकिंग में छलांग लगाई हो (बकौल विश्व बैंक पिछले साल की तुलना में भारत 30 तीस स्थान आगे बढ़कर 100वें नंबर पर पहुंचा गया है), मगर जहां तक बिजनेस प्रैक्टिस को अधिक समावेशी, अधिक जिम्मेदार बनाने का सवाल है, वह पुराने दस्तूर पर ही कायम है।

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किसान जो कथानक लिख रहे हैं

तीन दशक पहले देश में दो तरह के किसान आंदोलनों की चर्चा थी। उनमें एक तरफ संवैधानिक दायरे में चल रहे आंदोलन थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में महेंद्र सिंह टिकैत, महाराष्ट्र में शरद जोशी और कर्नाटक में एमडी नंदजुंदास्वामी के नेतृत्व में किसान मुख्य रूप से लाभकारी मूल्य के लिए संघर्ष की राह पर उतरे थे।

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Mid–Day Meal in Himachal: Kitchens of Casteism

Caste is a stronger divider in this picturesque Himachali village of Saraha than the river which cuts across dividing it into two halves. The west bank hosts mostly Dalit houses and the upper castes have occupied the east bank.

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Madhu’s murder and questions unanswered

An Adivasi youth named Madhu was beaten to death in Attapadi, Kerala by the public, for having stolen food items.
Following the death of Madhu, there has been an outrage against the murder and the murderers, who were not just inhumane to beat Madhu to death but also rejoiced the entire act which has been reflected in their acts.
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सांप्रदायिक नीतियों का भयानक परिणाम

मोदी सरकार के कार्यकाल का ये अंतिम साल है। किन उपलब्धियों और कामयाबियों को लेकर बीजेपी फिर जनता के पास जाएगी, इसको लेकर सरकार की बेचैनी अब साफ़ नज़र आ रही है। अच्छे दिनों के वादे, भ्रष्टाचार-मुक्ति, विकास और रोज़गार के बड़े-बड़े दावों के साथ बीजेपी सत्ता में आई थी। चुनावी रैलियों में जनता से कांग्रेस पार्टी के 60 सालों की ‘कोताहियों’ को ठीक करने के लिये सिर्फ़ 60 महीने देने की गुहार तब नरेंद्र मोदी ने की थी।

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लौट आया खदान मालिकों का जमाना!

भारत में फिर से कोयला खान मालिकों का जमाना आ गया है। 1970 के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिवाली की रात कोयला उद्योग का राष्ट्रीयकरण करके खान मालिकों की बत्ती गुल करवाई थी, जिससे शोषित-पीड़ित मज़दूरों का घर रोशन हो गया था।

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Indian Cities: Robbed of Commons

Urbanisation in India is taking place at a rapid pace. It is stated that 50 percent of the people will live in the cities and towns by 2030. There are questions raised about the kind of urbanisation happening in the Indian cities.

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Challenges before ‘Ayushman Bharat’

Ayushman Bharat is a nice name for a scheme that promises health insurance to nearly 40 percent of Indian population. Any such intent that offers insurance cover of Rs 5 Lakh to 10 crore families must be welcomed.

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Delusion, Deception, Deceit: Union Budget 2018-19

The fact that Indian agriculture is under considerable stress, and has been so for quite some time, is generally well acknowledged. As the latest Economic Survey presented a couple of days prior to the Union Budget noted; “In the last four years, the level of real agricultural GDP and real agricultural revenues has remained constant.

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आखिर ‘किसान सीज़न’ का सच क्या है?

किसान अचानक राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गए दिखते हैं। अब नरेंद्र मोदी सरकार भी खुद को किसानों की हितैषी दिखाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है, जबकि हकीकत यह है कि पिछले साढ़े तीन साल में ग्रामीण इलाके में बढ़े संकट का एक प्रमुख कारण उसकी ही नीतियां हैं।

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Insuring against Investment: How policies foster agricultural distress

2017-18 is turning out to be another poor year for agriculture. Despite improving monsoons, farmer suicides continue to mount caused by high levels of agrarian debt coupled with meager prices and low returns from farming.

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E-NAM: किसानों की योजना, व्यापारियों को इनाम

नरेंद्र मोदी सरकार ने अप्रैल 2016 में E-NAM यानि राष्ट्रीय कृषि बाज़ार की शुरुआत की थी। राष्ट्रीय कृषि बाज़ार की शुरुआत करते वक़्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि E-NAM देश के कृषि क्षेत्र में लिए एक बड़ा बदलाव लाएगा,और E-NAM से ना केवल किसानों को बल्कि कृषि क्षेत्र के तमाम हित धारकों को भी फ़ायदा मिलेगा।

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Challenge of cleanliness: No one solution to fit all

The 20th Century saw the rise of a new idea, or rather an idea which had existed for generations, but was finally understood and postulated as a conscious process; design. In the rise of this new-old idea (and one which happened primarily in the West)

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No Prime Minister, selling Pakodas is not employment

I admit I felt hurt by Prime Minister Narendra Modi’s recent assertion that a person earning Rs 200 a day by selling pakodas is also employed.

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