शबीना सिद्दीकी

शबीना सिद्दीकी
14 POSTS0 COMMENTS
https://www.hindkisan.com/

दुनिया को रोशनी देकर अपनी जिंदगी का अंधेरा दूर करने वाली महिलाओं की कहानी

‘मेरे पिताजी जमीन किराए पर लेकर खेती करते हैं, खेती की हालत तो आप जानती ही हैं। आर्थिक तंगी की वजह से...

धान की रिकॉर्ड सरकारी खरीद का दावा जमीन पर कहां खड़ा है

केंद्र सरकार खरीफ विपणन सीजन 2020-21 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की रिकार्ड खरीद होने के अनुमान जता रही है। केंद्रीय...

सब्जियों का न्यूनतम मूल्य तय करने वाला पहला राज्य बना केरल

केरल में पिनाराई विजयन सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सब्जियों की खरीद करने का फैसला किया है। प्रदेश सरकार के इस...

प्याज के दाम गिरे तो चर्चा नहीं, बढ़े तो इतना हंगामा क्यों होता है?

प्याज की कीमतें एक बार फिर आसमान छू रही हैं। इसे रोकने के लिए केंद्र सरकार ने न केवल स्टॉक लिमिट लगाने...

यूपी सरकार के फैसले से नाराज किसान, 30 नवंबर तक कोल्ड स्टोरेज में आलू रखे जाने की मांग

प्याज़ की तरह आलू की कीमतों में भी लगातार उछाल जारी है। खुदरा बाजार में आलू की कीमत 40 से 55 रुपये...

केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ पारित विधेयकों पर क्या कहते हैं किसान नेता

पंजाब की विधानसभा ने मंगलवार को केंद्र के कृषि कानूनों को राज्य में प्रभावहीन करने वाले तीन कृषि विधेयक को सर्वसम्मति से...

महाराष्ट्र से पंजाब तक कपास की एमएसपी को तरसे किसान

केंद्र सरकार हर मौके पर कृषि कानूनों से किसानों को फायदे होने के दावे कर रही है। उसका यह भी कहना है...

राष्ट्रीय महिला किसान दिवस पर खास, कहां गुम हैं महिला किसान

ग्रामीण आबादी में 73 फीसदी कामकाजी महिलाएं किसान हैं लेकिन इनके पास खेती लायक सिर्फ 12 फीसदी जमीन है। यह आंकड़ा कृषि...
- Advertisement -

Latest Articles

खेती में, कैसा हो किसान के विकास का मॉडल?

कृषि क़ानूनों के लेकर सरकार की तरफ़ से एक बार फिर से किसान संगठनों और नेताओं को चिट्ठी भेजी गयी है, उसमें कुछ नया नहीं सिवाय इसके कि सरकार खुले दिमाग़ और नीयत से मौजूदा गतिरोध ख़त्म करना चाहती है, ताज़ा चिट्ठी में किसानों की मुख्य माँग के अनुसार कोई प्रस्ताव नहीं, ऐसे में क्या हो वो विकास का मॉडल जो कृषि प्रधान देश भारत को suit करे, ख़ास बातचीत कृषि विशेषज्ञ, देविंदर शर्मा जी के साथ।

‘किसान दिवास’ पर किसान के ‘मन की बात’

किसान दिवास पर सुनें कि तीन कृषि क़ानून को लेकर वो क्या चाहते हैं, उनकी नज़र में कौन भ्रम फैला रहा है, आंदोलन में देश की महिला किसानों की कितनी भागीदारी है? क्या हैं उनके डर, क्यूँ दूर दराज़ के राज्यों से किसान आंदोलन में भाग लेने नहीं आ पा रहे, अगले कुछ दिनों में और कितने किसान दिल्ली कूच कर रहे हैं, किसान दिवास पर ख़ास बातचीत।

‘श्रद्धांजलि दिवस’ पर अन्नदाता को नमन

'श्रद्धांजलि दिवस' पर अन्नदाता को नमन

MP के किसानों से ही ‘मन की बात’ क्यूँ?

जब दिल्ली के बॉर्डर पर आंदोलनरत किसान तीन कृषि क़ानून को लेकर विरोध कर रहे हैं, मौजूदा गतिरोध पर प्रधान मंत्री की तरफ़ से कुछ रास्ता दिखाए जाने का इंतज़ार कर रहे हैं, मोदी जी ने इन क़ानून का बखान करते हुए मध्य प्रदेश के किसानों को सम्बोधित किया, msp की गारंटी और कृषि क़ानून वापस लिए जाने की माँग पर एक बार फिर उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। उन्हीं जवाब को तलाशने की कोशिश इस बातचीत में।

कृषि क़ानून: नीति, नेता, नीयत पवित्र फिर गतिरोध क्यूँ?

कृषि क़ानून से जुड़ी अहम तारीख़ों और शेयर बाज़ार में रिलायंस कम्पनी के शेयरों की चाल पर बारीकी से नज़र बनाएँ तो इनके बीच का नाता समझ पाएँगे, फिर शायद ये भी समझ आ जाए कि नीति, नेता और नीयत की पवित्रता के बावजूद किसान और सरकार के बीच गतिरोध क्यूँ?

कृषि क़ानून: MSP क्यूँ है ज़रूरी?

2 दिन पहले उत्तराखंड के कुछ किसान कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मिले, BKU के किसानों ने भी कृषि भवन में कृषि क़ानूनों के समर्थन में ज्ञापन दिया। क्या है अलग से इन मुलाक़ातों का कारण? ये कौन से किसान है जिनकी राय आंदोलित किसानों से अलग है? क्या उत्तराखंड के किसान भी बाक़ी किसानों की तरह इन कृषि क़ानून का विरोध कर रहे हैं? ये समझने के लिए बातचीत की पंतनगर के क़रीब खेती करने वाले प्रगतिशील किसान Rajender Pal Singh से।