अनिका ऐरन

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आखिर कितना असरदार है छत्तीसगढ़ सरकार का मंडी संशोधन विधेयक

माना जा रहा था कि जैसे पंजाब सरकार ने तीन कानून के असर को निष्क्रिय करने के लिए अपने खुद के नए...

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से किसे फायदा?

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग यानी ठेका खेती, मोदी सरकार ने हाल ही में मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौते-2020...

क्यों फसल बीमा से किसान ही नहीं, राज्य सरकारें भी पीछा छुड़ा रही हैं?

किसानों को खेत में फ़सलों की बुआई से लेकर उसकी कटाई तक तमाम जोखिमों से सुरक्षा देने वाली मोदी सरकार की फ़्लैगशिप...

मंडियां नहीं बचेंगी तो क्या होगा?

राज्यों ने एग्रीकल्चर मार्केटिंग प्रोड्यूस कमेटी यानी एपीएमसी एक्ट के तहत मंडियों को बनाया जिनसे किसानों को बड़ी सहूलियतें मिली हैं। मंडियों...

एमएसपी को क्यों नहीं मिल रहा कानूनी दर्जा?

संसद से पारित हो चुके कृषि विधेयकों के खिलाफ किसानों और उनके संगठनों ने 25 सितंबर को भारत बंद का ऐलान किया...
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खेती में, कैसा हो किसान के विकास का मॉडल?

कृषि क़ानूनों के लेकर सरकार की तरफ़ से एक बार फिर से किसान संगठनों और नेताओं को चिट्ठी भेजी गयी है, उसमें कुछ नया नहीं सिवाय इसके कि सरकार खुले दिमाग़ और नीयत से मौजूदा गतिरोध ख़त्म करना चाहती है, ताज़ा चिट्ठी में किसानों की मुख्य माँग के अनुसार कोई प्रस्ताव नहीं, ऐसे में क्या हो वो विकास का मॉडल जो कृषि प्रधान देश भारत को suit करे, ख़ास बातचीत कृषि विशेषज्ञ, देविंदर शर्मा जी के साथ।

‘किसान दिवास’ पर किसान के ‘मन की बात’

किसान दिवास पर सुनें कि तीन कृषि क़ानून को लेकर वो क्या चाहते हैं, उनकी नज़र में कौन भ्रम फैला रहा है, आंदोलन में देश की महिला किसानों की कितनी भागीदारी है? क्या हैं उनके डर, क्यूँ दूर दराज़ के राज्यों से किसान आंदोलन में भाग लेने नहीं आ पा रहे, अगले कुछ दिनों में और कितने किसान दिल्ली कूच कर रहे हैं, किसान दिवास पर ख़ास बातचीत।

‘श्रद्धांजलि दिवस’ पर अन्नदाता को नमन

'श्रद्धांजलि दिवस' पर अन्नदाता को नमन

MP के किसानों से ही ‘मन की बात’ क्यूँ?

जब दिल्ली के बॉर्डर पर आंदोलनरत किसान तीन कृषि क़ानून को लेकर विरोध कर रहे हैं, मौजूदा गतिरोध पर प्रधान मंत्री की तरफ़ से कुछ रास्ता दिखाए जाने का इंतज़ार कर रहे हैं, मोदी जी ने इन क़ानून का बखान करते हुए मध्य प्रदेश के किसानों को सम्बोधित किया, msp की गारंटी और कृषि क़ानून वापस लिए जाने की माँग पर एक बार फिर उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। उन्हीं जवाब को तलाशने की कोशिश इस बातचीत में।

कृषि क़ानून: नीति, नेता, नीयत पवित्र फिर गतिरोध क्यूँ?

कृषि क़ानून से जुड़ी अहम तारीख़ों और शेयर बाज़ार में रिलायंस कम्पनी के शेयरों की चाल पर बारीकी से नज़र बनाएँ तो इनके बीच का नाता समझ पाएँगे, फिर शायद ये भी समझ आ जाए कि नीति, नेता और नीयत की पवित्रता के बावजूद किसान और सरकार के बीच गतिरोध क्यूँ?

कृषि क़ानून: MSP क्यूँ है ज़रूरी?

2 दिन पहले उत्तराखंड के कुछ किसान कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मिले, BKU के किसानों ने भी कृषि भवन में कृषि क़ानूनों के समर्थन में ज्ञापन दिया। क्या है अलग से इन मुलाक़ातों का कारण? ये कौन से किसान है जिनकी राय आंदोलित किसानों से अलग है? क्या उत्तराखंड के किसान भी बाक़ी किसानों की तरह इन कृषि क़ानून का विरोध कर रहे हैं? ये समझने के लिए बातचीत की पंतनगर के क़रीब खेती करने वाले प्रगतिशील किसान Rajender Pal Singh से।