किसानों और उपभोक्ताओं के बीच कड़ी बन रहा फार्म ईआरपी

किसानों को सही दाम तो उपभोक्ताओं को सही खाना पहुंचाने की डिजिटल कोशिश है फार्म ईआरपी।

खेती में, कैसा हो किसान के विकास का मॉडल?

कृषि क़ानूनों के लेकर सरकार की तरफ़ से एक बार फिर से किसान संगठनों और नेताओं को चिट्ठी भेजी गयी है, उसमें कुछ नया नहीं सिवाय इसके कि सरकार खुले दिमाग़ और नीयत से मौजूदा गतिरोध ख़त्म करना चाहती है, ताज़ा चिट्ठी में किसानों की मुख्य माँग के अनुसार कोई प्रस्ताव नहीं, ऐसे में क्या हो वो विकास का मॉडल जो कृषि प्रधान देश भारत को suit करे, ख़ास बातचीत कृषि विशेषज्ञ, देविंदर शर्मा जी के साथ।

‘किसान दिवास’ पर किसान के ‘मन की बात’

किसान दिवास पर सुनें कि तीन कृषि क़ानून को लेकर वो क्या चाहते हैं, उनकी नज़र में कौन भ्रम फैला रहा है, आंदोलन में देश की महिला किसानों की कितनी भागीदारी है? क्या हैं उनके डर, क्यूँ दूर दराज़ के राज्यों से किसान आंदोलन में भाग लेने नहीं आ पा रहे, अगले कुछ दिनों में और कितने किसान दिल्ली कूच कर रहे हैं, किसान दिवास पर ख़ास बातचीत।

‘श्रद्धांजलि दिवस’ पर अन्नदाता को नमन

'श्रद्धांजलि दिवस' पर अन्नदाता को नमन

MP के किसानों से ही ‘मन की बात’ क्यूँ?

जब दिल्ली के बॉर्डर पर आंदोलनरत किसान तीन कृषि क़ानून को लेकर विरोध कर रहे हैं, मौजूदा गतिरोध पर प्रधान मंत्री की तरफ़ से कुछ रास्ता दिखाए जाने का इंतज़ार कर रहे हैं, मोदी जी ने इन क़ानून का बखान करते हुए मध्य प्रदेश के किसानों को सम्बोधित किया, msp की गारंटी और कृषि क़ानून वापस लिए जाने की माँग पर एक बार फिर उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। उन्हीं जवाब को तलाशने की कोशिश इस बातचीत में।

कृषि क़ानून: नीति, नेता, नीयत पवित्र फिर गतिरोध क्यूँ?

कृषि क़ानून से जुड़ी अहम तारीख़ों और शेयर बाज़ार में रिलायंस कम्पनी के शेयरों की चाल पर बारीकी से नज़र बनाएँ तो इनके बीच का नाता समझ पाएँगे, फिर शायद ये भी समझ आ जाए कि नीति, नेता और नीयत की पवित्रता के बावजूद किसान और सरकार के बीच गतिरोध क्यूँ?

कोरोना और लॉकडाउन ने कृषि समेत कई व्यावसायिक क्षेत्रों को प्रभावित किया है। ऐसे में फार्म ईआरपी किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बन कर सामने आया है। यह डिजिटल तरीके से किसानों और उपभोक्ताओं के बीच की दूरी को डिजिटल तरीके से कम कर रहा है। इसके साथ ही यह किसानों को फसल उगाने के लिए बेहतर तकनीकी सुविधाएं भी मुहैया करा रहा है।

फार्म ईआरपी कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग को बढ़ावा देने का काम करता है। फार्म ईआरपी का दावा है कि वह पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए टिकाऊ उपज उगाने के लिए किसानों के साथ काम कर रहा है। उन्हें रसायनों, उर्वरकों, और पानी के उपयोग के सही इस्तेमाल की जानकारी भी देता है।

फार्म ईआरपी सरकार के साथ सहयोग करते हुए किसान उत्पादक संघों यानी एफपीओ के साथ काम कर रहा है। संस्थान का दावा है कि वह 4 मुख्य उद्देश्यों पर काम करता है- स्थिरता, खाद्य सुरक्षा, जलवायु लचीलापन और ट्रेसबिलिटी।

फोटो क्रेडिट- farmerp.com

कैसे काम करता है फार्म ईआरपी

किसानों के सामने सबसे बड़ी मुश्किल फसल की सही कीमत नहीं मिलना है। फार्म ईआरपी किसानों को अधिकृत खरीदारों, खेती कंपनियों और हितधारकों के साथ संपर्क करने में मदद करता है। यह अपने आपूर्ति प्रबंधन सॉफ्टवेयर के साथ उत्पादन की जगह से बाजार में उपलब्धता तक किसानों को आपूर्ति श्रंख्ला से जोड़ता है। संस्था ने बहु-फसली खेती को बेहतर बनाने के लिए फसल योजना और फसल कार्यक्रम तैयार किये हैं। इसके लिए खेत पर्यवेक्षकों को मोबाइल क्लाइंट एल्पिकेशन पर उत्पादन के आंकड़े जुटाने के लिए प्रशिक्षित किया है जिसकी मदद से उत्पादन गतिविधियों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

इसके साथ ही फार्म ईआरपी लाइट ऐप पर किसानों को उनकी ‘सुरक्षित फसल के लिए’ सुविधा के माध्यम से मिट्टी के स्वास्थ्य और गिरावट पर विवरण प्रदान करके उनकी उपज की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद करता है। यह किसानों को रसायनों के छिड़काव संबंधी जानकारी भी महैया कराता है और इसके लिए ‘सेफ टू स्प्रे’ सुविधा किसानों की मदद करती है।

कृषि से जुडे़ स्टार्ट-अप का भविष्य कैसा है

कृषि से जुड़े स्टार्ट अप तेजी से तैयार हो रहे हैं। इनमें से कई कोरोना और लॉकडाउन में बेहतर विकल्प के तौर पर सामने आए हैं। जिन्होंने खेत से थाली के बीच तालमेल का काम किया है। फार्म ईआरपी ने स्मार्ट कृषि के डिजिलट प्लेटफॉर्म ने भारत में एक प्रमुख नए उत्पादन स्टार्ट-अप को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पूरे व्यवसाय का प्रबंधन करने में सक्षम बनाया है। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के मुताबिक भारतीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में अप्रैल 2000 से मार्च 2020 के बीच 9.98 बिलियन अमेरिकी डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई का निवेश हुआ है।

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