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भारत में कृषि कार्यों में 64% का होगा नुकसान: रिपोर्ट

फ़ोटो स्रोत : बिजनेस टुडे

आईएलओ की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ आने वाले वर्षों में भारत में हीट स्ट्रैस की वजह से किसान और खेतिहर मज़दूर के काम पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। वर्ल्ड इंप्लॉयमेंट एंड सोशल आउटलुक 2018 नाम की इस रिपोर्ट में ये कहा गया है कि अगर गर्मी इसी रफ़्तार से बढ़ती रही तो भारत में खेतों में काम के घंटों में 64 फ़ीसदी की कमी आ सकती है। 1995 में गर्मी की वजह से कुल कार्य समय में 4.2 प्रतिशत का नुकसान हुआ था। रिपोर्ट बताती है कि 21 वीं सदी के खत्म होने तक विश्व का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा और 2030 तक कुल कार्य समय में 5.3 % का नुकसान होगा। ये आंकड़ा तीन करोड़ आठ लाख पूर्णकालिक नौकरियों से होने वाले उत्पादन के बराबर है।

भारत में लगभग एक करोड़ 94 लाख नौकरियां स्वस्थ्य पर्यायवरण पर निर्भर है और ये कार्यरत आबादी की 52 प्रतिशत है। विशेष रूप से खेती, मछली पालन और वानिकी जैसे कार्य पूरी तरह से पर्यावरण पर निर्भर करते हैं। पर्यावरणीय पतन का सीधा प्रभाव इससे जुड़े श्रमिकों के जीवन पर पड़ेगा। ये सही है कि भारत में अक्षय ऊर्जा स्रोत तेजी से बढ़ रहे हैं लेकिन अभी भी भारत को कोयले, तेल और प्राकृतिक गैस और 80 प्रतिशत बिजली के लिए कार्बन उत्सर्जन पर निर्भर है। कार्बन उत्सर्जन पर निर्भरता पर्यावरणीय पतन की बड़ी वजह है।