समाचार
  • मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात
  • पराली पर मुआवजा बढ़ाने के लिए केंद्र से मांगी आर्थिक मदद
  • पंजाब के फिरोजपुर में पराली के मुद्दे पर किसानों ने रोकी रेल
  • पराली जलाने पर दर्ज मामले वापस लेने की मांग
  • मांगें ना माने जाने पर पड़ा आंदोलन करने की चेतावनी
  • हरियाणा में भी रोक के बावजूद पराली जलाने के मामले
  • फतेहाबाद में सामने आए 18 मामले
  • पाबंदी ना मानने वाले किसानों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी
  • पराली जलाने का दिल्ली की हवा में असर
  • दिल्ली में बढ़ा प्रदूषण का स्तर
  • 300 के पार पहुंचा एयर क्वालिटी इंडेक्स
  • राजस्थान के जयपुर में गहराया ज़ीका वायरस का संकट
  • सौ पहुंची मरीजों की संख्या
  • मच्छरों पर काबू पाने के उपाय तेज

From The Desk

गुजरात : भूमि अधिग्रहण मामले में 355 किसानों को ज़मानत

फ़ोटो स्रोत : द इंडियन एक्सप्रेस

गुजरात पुलिस ने 355 किसानों को ज़मानत दे दी है। लंबे समय से गुजरात के भावनगर के किसान गुजरात पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (जीपीसीएल) द्वारा ज़मीन अधिग्रहण के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रहे थे। 24 अप्रैल को जब इलाक़े के पांच हज़ार से ज़्यादा लोगों ने सरकार से इच्छामृत्यु की मांग की तो मामले ने तूल पकड़ लिया। इसके बाद, 13 मई की रात गुजरात के भावनगर ज़िले में पुलिस ने 355 किसानों को गिरफ़्तार कर लिया था। जिनमें 138 महिलाएं भी शामिल थीं। पुलिस का कहना था कि किसानों का संघर्ष हिंसक होने की वजह से उन्हें किसानों को गिरफ़्तार करना पड़ा। फ़िलहाल गुजरात पुलिस ने सभी किसानों को ज़मानत दे दी है।

गुजरात पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने लगभग दो दशक पहले अपना प्रस्तावित लिग्नाइट संयंत्र स्थापित करने के लिए भावनगर में घोघा तालुक के 12 गांवों में लगभग 1,200 से ज़्यादा किसानों की 3,377 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। 1,414 हेक्टेयर ज़मीन के बदले कंपनी ने 1995 से लेकर 2005 के बीच मुआवज़ा भी दिया, लेकिन इस दौरान ज़मीन पर किसानों का कब्ज़ा बरकरार रहा। किसानों की मांग है कि इस मामले में भूमि अधिग्रहण क़ानून 2013 के प्रस्तावों को लागू किया जाए। किसानों की दलील है कि पूरा मामला उच्च न्यायालय में लंबित है। लिहाज़ा न्यायिक फ़ैसले से पहले पुलिस की मदद से ज़मीन पर कब्ज़ा करना बलप्रयोग है।