समाचार
  • केरल में बाढ़ से भारी तबाही
  • 500 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सहायता का ऐलान
  • मृतकों के परिजनों को 2 लाख और घायलों को 50 हज़ार रुपये का मुआवज़ा
  • केरल सरकार ने केंद्र से मांगी थी 2000 करोड़ रुपये की मदद
  • उत्तर प्रदेश: झांसी में आवारा जानवरों से परेशान किसान
  • फसल बर्बाद होने का सदमा नहीं झेल पाया किसान
  • दिल का दौरा पड़ने से किसान ने खेत में तोड़ा दम
  • महाराष्ट्र: पुणे में किसानों ने मौसम विभाग के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई
  • मौसम विभाग पर ग़लत जानकारी देने का आरोप लगाया
  • स्वाभिमानी शेतकारी संगठन ने मौसम विभाग पर दर्ज कराया मामला
  • मध्य प्रदेश: बीना परियोजना के ख़िलाफ़ किसानों का प्रदर्शन
  • डूब प्रभावित इलाकों के किसानों का प्रदर्शन
  • किसानों ने रखी परियोजना को रद्द करने की मांग
  • हरियाणा: पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने की पहल
  • चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय को मिले चार करोड़ रुपये
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने दी आर्थिक सहायता

Debate

संघर्ष का संगम


किसान, दलित और पूर्व सैनिकों के आंदोलन अब एक मंच पर आ रहे हैं। अखिल भारतीय किसान सभा ने 9 अगस्त को भारत बंद की अपील की है। दूसरे किसान संगठन उसे समर्थन देने का एलान पहले ही कह चुके हैं। अब दलित और पूर्व सैनिकों के संगठनों ने किसान संगठनों के साथ मिलकर आंदोलन चलाने का एलान किया है। एससी-एसटी ऐक्ट को कमज़ोर करने और दलितों पर अत्याचार के ख़िलाफ मुहिम चला रहे दलित संगठन और ‘वन रैंक-वन पेंशन’ की मांग के समर्थन में आंदोलन चला रहे पूर्व सैनिकों के संगठन 9 अगस्त के ‘भारत बंद’ में शामिल होंगे। इन सबकी एक जैसी शिकायत है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने उनका विश्वास तोड़ा है। तो आंदोलनों के इस संगम का संदेश क्या है? क्या इससे किसान, जवान और आम इनसान की गरिमा की लड़ाई के लिए कोई नया रास्ता निकलेगा? इन सवालों पर ये ख़ास चर्चा।