समाचार
  • प्रोमोशन में आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के पाले में डाली गेंद, कहा इस पर नियम बना सकती है सरकार
  • अब संसद की तरह लाइव दिखेगी सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
  • केंद्रीय कैबिनेट ने चीनी उद्योग के लिए साढ़े पांच हजार करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी
  • देश भर के गन्ना किसानों का करीब 13 हज़ार करोड़ रुपये चीनी मिलों पर बकाया
  • चीनी उद्योग के लिए 5,500 करोड़ रुपये के पैकेज की मंजूरी
  • अब बैंक खातों और मोबाइल नंबर को आधार से जोड़ना जरूरी नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने दिया ऐतिहासिक फैसला
  • उत्तर प्रदेश के सीतापुर में संक्रामक बीमारी से 53 लोगों की मौत, डर के मारे ग्रामीण घर-बार छोड़ने को मजबूर
  • चीनी उद्योग के लिए कैबिनेट ने फिर किया पैकेज का ऐलान, किसानों को बकाया भुगतान दिलाने का दावा
  • पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से किसान बेहाल, मथुरा में हल खींचकर जताया विरोध
  • सुप्रीम कोर्ट ने आधार को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया लेकिन बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर को आधार से जोड़ना जरूरी नहीं
  • स्कूल, कॉलेज में दाखिले के लिए आधार नंबर की मांग नहीं की जा सकती है
  • किसी भी बच्चे को आधार के बिना सरकारी योजनाओं का लाभ देने से इनकार नहीं किया जा सकता है
  • आयकर और पैन कार्ड के लिए अब भी जरूरी आधार

Conversation

आगे का रास्ता

दिल्ली में पांच सितंबर प्रभावशाली मज़दूर-किसान संघर्ष रैली हुई। इसके आयोजकों में अखिल भारतीय किसान सभा, सीटू और ऑल इंडिया एग्रीकल्चरल वर्कर्स यूनियन शामिल थे। इसके पहले अखिल भारतीय किसान सभा ने पिछले मार्च महीने में मुंबई में बहुचर्चित लॉन्ग मार्च का आयोजन किया था।

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"मजदूर-किसानों का गुस्सा सरकार की नीतियों के खिलाफ"

बुधवार को बड़ी भारी तादाद में मजदूर-किसानों ने मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। समाज का ये वर्ग सरकार से क्यों नाराज है? आखिर क्या चाहते हैं मजदूर-किसान? इन मुद्दों पर अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्ला के साथ हिंद किसान संवाददाता शशांक पाठक की बातचीत

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किसान-मज़दूर रैली पर बीजू कृष्णन से ख़ास बातचीत

5 सितंबर को दिल्ली में देशभर से मज़दूर और किसान जुटेंगे। ‘मज़दूर-किसान संघर्ष रैली’ के मुद्दों पर अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव वीजू कृष्णन के साथ हमारे संवाददाता शशांक पाठक ने ख़ास बातचीत की।

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वर्चस्व टूटने की बेचैनी

मराठा, जाट या पाटीदार जैसी दबंग जातियां आज आरक्षण क्यों मांग रही हैं? क्या इसकी वजह बढ़ता कृषि संकट है? या पुराने सामाजिक वर्चस्व के टूटने से पैदा हुई अपनी बेचैनी का इज़हार वे आरक्षण की मांग के लिए आंदोलन छेड़ कर कर रही हैं?

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